Saturday, March 12, 2011

कांग्रेस में बढती कलह

अगर सब कुछ इसी तरह चलता रहा तो सूबे के जनता तो पहले ही हाथ का साथ छोड़ चुकी है...अब तो नेता और कार्यकर्ता भी हाथ से हाथ छुड़ा ही लेंगे..
जब जहाज डूबता है तो एक -एक कर उसके सवार उसका साथ छोड़ जाते हैं ...कुछ यही बिहार कांग्रेस में भी चल रहा है...चुनाव में मात खाने के बाद से पार्टी में जबरदस्त उथल -पुथल है.. महबूब अली कैसर के इस्तीफे से शुरू हुआ सिलसिला आज विधान परिषद् सदस्य महाचंद्र प्रसाद सिंह के त्यागपत्र तक जा पहुंचा ...गिनती के चार विधायकों वाली पार्टी  में मुंडे - मुंडे मतर्भिन्ने की लहर चल रही है..चार सीटों से संतुष्ट हुई पार्टी में असंतुष्ट कार्यकर्ताओं और नेताओं की फेहरिस्त तेज़ी से उभर रही है...गुटबाजी से घिरी कांग्रेस में नित दिन नए झमेले उजागर हो रहे हैं...दरअसल पार्टी की पकड़ दिनोंदिन कमज़ोर होती जा रही...मगर नेता दिनबदिन महत्वाकांक्षी होते चले जा रहे हैं....नतीजतन आपसी खींचतान के सिवा  कुछ निकल कर नही आ रहा ....पार्टी के पास सुदृढ़ नेतृत्व का भी अभाव है...कैसर की जमीनी पकड़ के हाल तो जगजाहिर हैं ...सदानंद सिंह  सरीखे अनुभवी  नेता ने सन्यांस का ऐलान कर पार्टी की चिंताएं और बढ़ा दी हैं ...ऐसे में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने भी राज्य के कांग्रेसियों को कम नही छला..भला पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने किस चश्मे से देखा की उसे पार्टी में कोई केंद्रीय कार्यकारिणी में शामिल होने लायक नही दिखा ....अगर सब कुछ इसी तरह चलता रहा तो सूबे के जनता तो पहले ही हाथ का साथ छोड़ चुकी है...अब तो नेता और कार्यकर्ता भी हाथ से हाथ छुड़ा ही लेंगे..

-तरुण झा

1 comment:

  1. झा जी...सही कहा आपने... अगर बिहार कांग्रेस के भीतर अंतकलह शांत नहीं हुआ तो ये आपस में लड़ कर पार्टी की छवि तो खराब कर ही रहे हैं कुछ दिन बाद बिहार से इनका अस्तित्व भी समाप्त हो जायेगा...

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