Saturday, June 18, 2011

फोन उठाकर कुत्ता बोला, हैलो़! हैलो! थानेदार..

गैरजिम्मेदाराना कार्यशैली पर तीखा प्रहार किया। प्राचार्य अनंत सहाय की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में राशिद ने अपनी रचना 'इंसाफ की दुनिया में ये कैसी तबाही है, बहरों की अदालत है, गूंगों की गबाही है।' के माध्यम से आज के अदालती कार्रवाई पर रोशनी डाला। इसी प्रकार सरफराज की रचना 'किस्मत ने की मजाक मरी जिन्दगी के साथ, अरमां भी मिट गये मेरी हर खुशी के साथ' मेघना आनंद की 'कैसे कह दूं कि तेरी तमन्ना ही नही है, इस बात को तूझकों, लेकिन कहना भी नहीं है'। डा. आनंद प्रकाश वर्मा के 'ना जाने कैसे कैसे जिये जा रहे हैं लोग, बाजारवाद की दौड़ में नई पीढ़ी के बीच बौना हो गया हूं, अपने ही शहर में मैं बेगाना बन गया हूं।' को लोगों ने सराहा। मौके पर शहबाज आलम, अब्दुल मलिक, मनोज, सुशील, इंद्रजीत, प्रवीण, ममता वर्मा आदि मौजूद थे।

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